ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे

Submitted by संजीव.ढढवाल on रवि, 07/29/2018 - 23:32
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे

१३० किलोमीटर लंबे ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे (पूर्वी परिधीय द्रुतमार्ग- ई०पी०ई०)- जिसे नेशनल एक्सप्रेस-वे (राष्ट्रीय द्रुतमार्ग-२) भी कहा जाता है - ने विभिन्न स्तरों पर मनभावन सुखद समाचार दिए हैं। इसकी हरियाली से भरपूर छह: लेन, सुरम्य एवं सुविधापूर्ण यात्रा प्रदान करती हैं।

यह भारतवर्ष का प्रथम "स्मार्ट एवं हरित एक्सप्रेस-वे" है और इन दावों की छानबीन एवं पुष्टि हम इस विचार-विमर्श में करेंगे। भारत सरकार के "सड़क एवं राजमार्ग" क्षेत्र में, समय से पहले समाप्त किए जाने वाली परियोजना की यह द्रुतमार्ग विलक्षण विशेषता रखता है। यही नहीं, निर्माण केवल ५०० दिनों में करके एक भारतीय कृतिमान बनाया गया; जबकि निर्धारित समय सीमा ९१२ दिन थी।

जनसेवा में इस उपलब्धि के लिए, सड़क परिवहन मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एन०एच०ए०आई०), और सभी ठेकेदार, बधाई के पात्र हैं।

इस स्थापित मापदंड की तुलना में ही भविष्य के सड़क एवं अन्य निर्माण कार्य के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके साथ ही, यह आशा भी की जाती है कि अब समय-पर या समय-से-पहले परियोजना का समापन करने को ही मानक माना जाएगा; ना कि अपवाद।

ई०पी०ई० की आवश्यकता क्यों थी?

₹ ११,००० करोड़ की परियोजना के विषय में यह एक समुचित प्रश्न है!

विचारणीय तथ्य है कि, राजमार्गों पर स्थित सभी मुख्य नगरों में पुल अथवा बाईपास होते हैं, जिससे कि उस यातायात को जिसे शहर में जाने की आवश्यकता नहीं हो को नगर के बाहर से ही निकाला जा सके। इस प्रकार का कोई उचित विकल्प राष्ट्रीय राजधानी के लिए उपलब्ध नहीं था।

इसके परिणामस्वरुप, ५०,००० से अधिक व्यवसायिक वाहन अनावश्यक ही, भीड़ और भीषण प्रदूषण फैलाते हुए, नित्य दिल्ली की सड़कों से गुजरते थे। ई०पी०सी०ए० की जाँच के अनुसार, प्रदूषण में २८% तक का योगदान इन वाहनों की इतनी अधिक संख्या से होता था!

एक और तथ्य यह है कि, मूलतः, भीड़ का अर्थ ही धीमी गति और रुक-रुक के बढ़ता यातायात है। वाहन सबसे अधिक प्रदूषण इंजन व्यर्थ में चलते समय करता है, उदाहरणतय:, हरी बत्ती की प्रतीक्षा करते समय। इन तथ्यों पर विचार करने के पश्चात, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने एन०एच०ए०आई० को ई०पी०ई० बनाने के निर्देश दिए, जिससे दिल्ली की भीड़ और प्रदूषण में कमी आए।

हमें ई०पी०ई० कब लेना चाहिए

अतिरिक्त टोल को भी ध्यान में रखते हुए।

ई०पी०ई० का उपयोग करते समय हमें टोल देना होगा, जो कि कारों के लिए ₹ १.३८ प्रति किलोमीटर से लेकर अत्यधिक विशाल वाहनों के लिए ₹ ८.९५ तक है। फ़िर भी, हम इसे अपने सफ़र करने के लिए क्यों चुनें? इसी विषय पर हम इस खंड में चर्चा करेंगे।

प्रथमतय:, आप दिल्ली के प्रदूषण में और बढ़ोतरी नहीं करते हैं। दूसरा, सर्वेक्षण बताते हैं कि, राजमार्ग ईंधन की खपत में १० से ४०% तक की बचत करवाते हैं। फ़लस्वरूप ई०पी०ई० हर लीटर पर ₹१९ की बचत में कारगर हो सकता है; अगर हम पेट्रोल की कीमत ₹ ७६ और बचत की औसत २५% मानें। इसीलिए, ई०पी०ई० से ईंधन की बचत लगभग टोल के बराबर होगी।

आप इसे १२० किलोमीटर प्रति घंटे की तीव्र गति से सरपट पार करते हैं। परिणामस्वरूप, आपके कीमती समय की बचत के साथ-साथ वाहन एवं चालक दोनों की थकान में कमी आती है। और, व्यवसायिक वाहनों को दिल्ली नगर निगम (एम०सी०डी०) को दिया जाने वाला टोल भी बचता है।

आपको जो मानसिक शांति और वाहन चलाने के आनंद की अनुभूति होती है, वह बिल्कुल निशुल्क है! यह इसलिए संभव होता है क्योंकि यहाँ दुपहिया एवं अन्य धीमी गति के वाहन वर्जित हैं। यदि आपको दिल्ली के अंदर जाने की आवश्यकता नहीं है तो आपको ई०पी०ई० से यात्रा करनी चाहिए।

एन०एच०-१ के किलोमीटर ३६.०८ पर कोंडली से शुरू हो कर, यह एन०एच०-२ के किलोमीटर ६४.३३ पर पलवल में समाप्त होता है। इसमें कई अन्य स्थानों पर भी निकासी है जिससे आप दिल्ली के बाहर से निकल कर अपने गंतव्य पर शीघ्र पहुँच सकते हैं। यदि आप गाजियाबाद, नोएडा, इत्यादि की ओर भी जा रहे हैं तो भी दिल्ली की भीड़ से पूर्णतह: बचने के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं।

भारतवर्ष का प्रथम हरित द्रुतमार्ग

सूक्ष्म टपक सिंचाई (ड्रिप सिंचाई) से सिंचित लगभग ढाई लाख पेड़ ई०पी०ई० पर लगाए गए हैं; औसतन १८५० पेड़ प्रति किलोमीटर! तथा, वर्षा जल संचयन तंत्र भी प्रति ५०० मीटर पर स्थापित हैं। हरियाली, पानी की बचत, वर्षा जल संचयन, इत्यादि अवश्य ही इसे पूर्णतय: हरित बनाते हैं। इसके अतिरिक्त यह, ४० रंग बिरंगे फव्वारे और ३६ प्रसिद्ध स्मारकों की प्रतियाँ से सुसज्जित है। इनसे यात्रा की नीरसता भंग होती है और प्राकृतिक छटा निखरती है। यहां तक कि, ई०पी०ई० की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आठ, ४ मेगावाट के सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए गऐ हैं वह इसे पूर्णतया हरित बनाते हैं।

भारतवर्ष का प्रथम चतुर (स्मार्ट) द्रुतमार्ग

सही अर्थों में, समकालीन अत्याधुनिक तकनीक के उपयोग के कारण ही ई०पी०ई० चतुर द्रुतमार्ग है। उपयोग की गयी तकनीक में, प्रवेश के पूर्व ही गति-में-भारोत्तोलन विधि, स्वीकृत से अधिक भार वाले वाहन का प्रवेश वर्जित करती है। पूरे राजमार्ग पर "तंतु प्रकाशिकी" (फाइबर ऑप्टिक्स) का जाल बिछाया गया है, जिससे यहां पर घटने वाली समस्त घटनाओं का अतिशिघ्र पता लगाकर निवारण किया जा सकता है।

यहां पर अन्य आधुनिक तकनीकों जैसे कि परिवर्तनशील सूचना संकेतपट एवं सी०सी०टी०वी० से सुसज्जित ‘राजमार्ग यातायात प्रबंधन प्रणाली’ (हाईवे ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम), वीडियो घटना पहचान प्रणाली, फुटपाथ प्रबंधन प्रणाली, चेतावनी यंत्र, इत्यादि का उपयोग इसे एक चतुर (स्मार्ट) द्रुतमार्ग बनाते हैं। एक वाहन चालाक के लिए इन सभी का अर्थ यह है कि, उसे ‘सुविधा के साथ सुरक्षा’ भी प्राप्त होती है।

परंतु किसी भी स्तिथि में, अपने वाहन के ऐकसीलेटर पर बहुत अधिक महत्वकांक्षी होने की कोशिश भी मत कीजिएगा! मान्य गति से अधिक पर वाहन चलने को रोकने एवं चालक को अर्थदण्ड देने हेतु ई०पी०ई० स्वत:-चालान से सज्जित है। सावधान रहें! यहां प्रत्येक दो किलोमीटर पर, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर दृष्टि रखने के लिए, कैमरे स्थापित हैं।

ई०पी०ई० - संक्षेप में

बिना किसी झिझक के इसे भारत सरकार की बड़ी परियोजनाओं के संदर्भ में एक मील का पत्थर माना जा सकता है। इसके अतिरिक्त, संपूर्ण परियोजना की रचना एवं राष्ट्र को समर्पण, पर्यावरण के प्रति कृतज्ञता के अंतर्गत हुआ है।

कृपया, भारतवर्ष के प्रथम "स्मार्ट एवं हरित द्रुतमार्ग" पर अपने अनुभव एवं सुझाव हमसे साँझा करें।

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