वाहन बीमा

विटर पर सांझा करें व्हाट्सएप पर सांझा करें फेसबुक पर सांझा करें
Google Play पर पाएं

सर्वविदित तथ्य है कि बीमा किसी भी अप्रत्याशित दुर्भाग्यपूर्ण घटना की स्थिति में हमारे बचाव के लिए ढाल का काम करता है । किसी भी अन्य प्रकार का बीमा करवाना हमारी इच्छा अथवा आवश्यकता पर निर्भर करता है । परंतु, संपूर्ण भारतवर्ष में वाहन का बीमा करवाना यातायात नियमों के अंतर्गत अनिवार्य है।

 

किन वाहनों के लिए बीमा अनिवार्य है?


प्रत्येक मोटर चालित वाहन के लिए बीमा करवाना अनिवार्य है। नियमानुसार चाहे वाहन दुपहिया, तीन पहिए या चार पहिए का हो, इन सब के लिए तृतीय पक्ष बीमा (थर्ड पार्टी इंश्योरेंस) वैधानिक रूप से आवश्यक है। २०१८ में पारित ‘बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण’ (आई॰ आर॰ डी॰ ए॰ आई॰) के अनुसार में बैटरी चालित ई-रिक्शा इत्यादि का भी बीमा करवाना आवश्यक है।

तृतीय पक्ष बीमा में वाहन मालिक, बीमा कंपनी, एवं तृतीय पक्ष शामिल होता है। बीमा नियमों के अनुसार तृतीय पक्ष का तात्पर्य वाहन स्वामी के अतिरिक्त किसी अन्य (तीसरे व्यक्ति) की जान या माल को होने वाली क्षति से होता है। तृतीय पक्षिए बीमा अनुबंध के अंतर्गत बीमा कंपनी इस नुकसान की भरपाई वाहन स्वामी की ओर से करती है।

 

वाहन बीमा की महत्वता


यातायात नियमों के अनुसार: राष्ट्रीय यातायात नियमों की धाराओं के अनुसार यदि आप वाहन, बीमा प्रमाण पत्र की मूल अथवा प्रमाणित प्रतिलिपि के बिना, चलाते हुए पाए जाते हैं तो यह नियमों का उल्लंघन माना जायेगा (यदि पिछले ७ कार्य दिवसों के भीतर करवाया है तो यह उल्लंघन नहीं माना जाएगा)।

अप्रत्याशित दुर्भाग्यपूर्ण घटना की स्थिति में: वाहन बीमा इन स्थितियों से निपटने में हमें सक्षम बनाता है। यह स्ताथियाँ चोरी, यातायात दुर्घटना में अपने वाहन को अथवा किसी अन्य की जान और / या माल को क्षति हो सकती हैं।

एक महत्वपूर्ण एवं आश्चर्यजनक तथ्य: एक सर्वेक्षण के अनुसार भारतवर्ष में ३० प्रतिशत से अधिक वाहन चालक अपने वाहनों का बीमा नहीं करवाते हैं। बीमा रहित वाहनों में दुपहिया वाहनों का प्रतिशत सबसे अधिक है। इसके साथ अन्य सच्चाई यह भी है दुपहिया वाहन ही सबसे अधिक यातायात दुर्घटनाओं में संलिप्त होते हैं। यदि आप दुपहिया वाहन चलाते हैं तो अपनी सुरक्षा के लिए इस तथ्य को ध्यान में रखें।

 

बीमा दावा करने की प्रक्रिया


वाहन दुर्घटना या चोरी की स्थिति में आपको निकटतम थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट (ऍफ॰ आई॰ आर॰) दर्ज करवानी होती है। दुर्घटना की स्थिति में आपके वाहन का पंजीकरण, चालक लाइसेंस एवं कोई प्रत्यक्षदर्शी होने पर उनका नाम एवं संपर्क जानकारी, जैसे कि मोबाइल नंबर इत्यादि, लेना जरूरी होता है।

ऍफ॰ आई॰ आर॰ दर्ज करवाने के पश्चात आप बीमा कंपनी के निकटतम कार्यालय जा कर निर्धारित फार्म भरने के पश्चात अपना दावा पेश कर सकते हैं। बीमा कंपनी में दावा करते समय आपको व्यय के लिखे जोखे के मूल दस्तावेज संलग्न करने होते हैं।

यातायात वाहन दुर्घटना में चोट या किसी अन्य की मृत्यु होने की स्थिति में तृतीय पक्ष बीमा के नियमों के अनुसार आवंटित की जाने वाली राशि की कोई निर्धारित सीमा नहीं है। धन राशि का निर्णय न्यायालय द्वारा किए जाने के पश्चात बीमा कंपनी तृतीय पक्ष अथवा पीड़ित को धनराशि आवंटित करती है।

 

बीमा दावा करते समय ध्यान रखने योग्य बातें


पीड़ित द्वारा वाहन चालाक की त्रुटी सिद्ध करना: वाहन दुर्घटना एवं तृतीय पक्ष के नुकसान की स्थिति में पीड़ित को यह स्वयं सिद्ध करना होता है कि वाहन चालक की त्रुटि के कारण उसे यह क्षति पहुंची है। इस स्थिति में न्यायालय द्वारा निर्धारित धनराशि ही मान्य होती है। परंतु यह दावा केवल एक बार ही किया जा सकता है।

बीमा दावा करने से पहले विचारणीय अनुमान: अन्य परिस्थितियां जैसे कि वाहन को क्षति होना इत्यादि में बीमा दावा करने से पहले आप कुल व्यय का अनुमान लगा लें। इसके साथ ही साथ आप यह भी अनुमान लें कि दावा ना करने की स्थिति में अगला बीमा करवाने पर बीमा कंपनी आपको कितना लाभ (नो क्लेम बोनस) देगी। इस प्रकार आप यह निर्धारित कर पाएंगे कि इस परिस्थिति में आपको बीमा दावा करना चाहिए या नहीं, फल्सवरूप आप बचत कर सकते हैं।

 

 

शब्द ज्ञान

शंकरा (संज्ञा)

अर्थ:- शिव की पत्नी।

उदाहरण:- पार्वती भगवान गणेश की माँ हैं।

पर्यायवाची:- अंबा, अंबिका, अचलकन्या, अचलजा, अद्रि-कन्या, अद्रि-तनया, अद्रिकन्या, अद्रिजा, अद्रितनया, अपरना, अपर्णा, अम्बा, अम्बिका, आर्या, इला, उमा, गिरिजा, गौरी, जग जननी, जग-जननी, जगजननी, जगत् जननी, जगत्-जननी, जगदीश्वरी, जगद्जननी, जया, त्रिभुवनसुंदरी, त्रिभुवनसुन्दरी, देवेशी, नंदा, नंदिनी, नन्दा, नन्दिनी, नित्या, पंचमुखी, पञ्चमुखी, पर्वतजा, पार्वती, भगवती, भवभामिनी, भववामा, भवानी, भव्या, मंगला, महागौरी, महादेवी, मृड़ानी, रुद्राणी, वृषाकपायी, शंकरी, शंभुकांता, शताक्षी, शम्भुकान्ता, शिवा, शैलकन्या, शैलकुमारी, शैलजा, शैलसुता, शैलेयी, सुनंदा, सुनन्दा, हिमजा, हिमसुता, हिमालयजा, हेमसुता, हैमवती