मदिरापान एवं वाहन चालन

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सुरक्षित रूप से वाहन चलाने के लिए चालक को तन व मन से दोंनों से स्वस्थ होना चाहिये। चालक का अपने अंगों तथा इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण होना चाहिये। मादक पदार्थों (मदिरा / शराब इत्यादि) का सेवन हमारी वाहन चलाने व निर्णय लेने की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है, जिससे दुर्घटना की संभावना बढ जाती है। अत: नशा करके वाहन चलाना एक अपराध है। यहां हम नशा एवं वाहन चालन से सम्बंधित नियमों से परिचय करायेंगे।

 

नशे की परिभाषा


रक्त में मदिरा (शराब) की एकाग्रता की मात्रा से नशा मापा जाता है। भारतीय मोटर वाहन अधिनियम १९८८ के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के प्रति १०० मिलीलीटर रक्त में ३० मिलीग्राम तक मदिरा है तो वह वाहन चलाने योग्य माना जाता है। रक्त में इससे अथिक मात्रा में मदिरा होने पर व्यक्ति को नशे में माना जाएगा और इस स्तिथि में वाहन चलाना अपराध है।

भारत के अधिकांश राज्यों में मदिरापान की न्यूनतम उम्र २१ वर्ष। अत: न्यूनतम उम्र से कम उम्र के वाहन चालक के रक्त में मदिरा की कोई भी मात्रा दंड का कारण हो सकती है।

रक्त में मदिरा की मात्रा का मापन, “श्वास विश्लेषक” यंत्र के द्वारा किया जाता है।

 

संबंधित दंड अधिनियम


नशा करके वाहन चलाने पर दंड का प्रावधान भारतीय मोटर वाहन अधिनियम १९८८ की धारा १८५ में उल्लिखित है।

स्वीकार्य मात्रा से अधिक मदिरापान या अन्य मादक (नशीले) पदार्थों का सेवन करके वाहन चालाने पर ₹२,००० तक का अर्थदंड तथा ६ माह का कारावास या दोनों प्रकार की सजा हो सकती है। यदि कोई वयक्ति यही अपराध ३ वर्ष के भीतर दोहराता है तो ₹३,००० तक का अर्थदंड तथा २ वर्ष का कारावास या दोनों प्रकार की सजा हो सकती है।

 

ध्यान देने योग्य बातें


  • मादक पदार्थों के सेवन से संबंधित वाहन चालन नियमों में घटना स्थान पर दंड सूचित करने का कोई प्रावधान नहीं है।
  • यदि एक वर्दीधारी पुलिसकर्मी को किसी वयक्ति पर मदिरापान करके वाहन चलाने का संशय है तो वह उस वयक्ति को “श्वास विश्लेषण” का आग्रह कर सकता है। “श्वास विश्लेषण” के लिए मना करने की परिस्तिथि में पुलिसकर्मी बिना वारंट के बंदी (गिरफ्तार) बना सकता है।
  • बंदी बनाने की परिस्तिथि में पुलिस २ घंटे के भीतर आपका चिकित्सीय परीक्षण कराएगी अन्यथा उन्हें आपको छोड़ना पड़ेगा।
  • नशे की जांच करने के लिए “श्वास विश्लेषण” के अतिरिक्त और भी विधियां होती हैं जैसे कि रक्त की जांच करना।
  • यदि आप घटनास्थल पर किसी भी प्रकार की जांच को अस्वीकृत करते हैं तो आपके वाहन चलाने के लिए अक्षम माना जा सकता है। इस स्तिथि में पुलिसकर्मी चालक लाइसेंस एवं अन्य दस्तावेज जब्त कर सकता है।

 

 

 

शब्द ज्ञान

आत्मभू (संज्ञा)

अर्थ:- नर संतान।

उदाहरण:- कृष्ण वसुदेव के पुत्र थे। पुत्र कुपुत्र हो सकता है लेकिन माता कुमाता नहीं हो सकती।

पर्यायवाची:- अंगज, आत्म-संभव, आत्म-सम्भव, आत्मज, आत्मजात, आत्मनीन, आत्मप्रभव, आत्मसंभव, आत्मसमुद्भव, आत्मसम्भव, आत्मोद्भव, इब्न, किशोर, कुँवर, कुंवर, कुमार, चिरंजी, चिरंजीव, जात, जाया, तनय, तनुज, तनुभव, तनुरुह, तनू, तनूज, तनूद्भव, तनूरुह, तनोज, तनौज, दायदवत्, नंदन, नन्दन, पुत्र, पूत, फरजंद, फरजन्द, फरज़ंद, फरज़न्द, फरज़िंद, फरज़िन्द, फरजिंद, फरजिन्द, फर्जंद, फर्जंन्द, फर्ज़ंद, फर्ज़न्द, फर्ज़िंद, फर्ज़िन्द, फर्जिंद, फर्जिन्द, बच्चा, बाल, बालक, बेटा, मोड़ा, लड़का, लाल, वटु, वटुक, वीर्यज, सुत, सूत