वाहन प्रदूषण

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प्रदूषण नियंत्रण के लिए विभिन्न देशों में विविध प्रकार के अधिनियमों और मानकों का पालन किया जाता है। भारत में यह मानक बी॰एस॰ई॰एस॰ (BSES), अर्थात "भारत स्टेज उत्सर्जन मानकों" के नाम से जाना जाता है।

२०१७ में भारत स्टेज ४ देशभर में लागू कर दिया गया था। भारतीय सरकार के द्वारा उठाए एक अहम कदम में भारत स्टेज ५ मानकों को छोड़ कर सीधा भारत स्टेज ६ लागू करने का संकल्प लिया गया है।

यह नियम, वाहन उत्सर्जन (एमिषन) के समय निकलने वाली हानिकारक गैसों की मात्रा पर अंकुश लगाने के लिए बनाए गए हैं। भारतीय मोटर वाहन अधिनियम और बी॰एस॰ई॰एस॰ के अनुसार मोटर वाहन पंजीकरण एवं प्रदूषण नियंत्रण के बारे में इस लेख में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई है।

वाहन प्रदूषण

संबंधित नियम एवं धाराएं


वाहन प्रदूषण से सम्बंधित नियम केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम १९८९ में परिभाषित हैं। उक्त अधिनियम की मुख्य धाराओं का संक्षिप्त वर्णन यहां दिया गया है।

  • धारा ११५ (७) – नए वाहन के लिए १ वर्ष तक वाहन प्रदूषण जांच की आवश्यकता नहीं होती है, तत्पश्चात प्रत्येक ६ माह पर प्रदूषण के लिए जांच करानी होगी।
  • धारा ११६ – पुलिस सब-इंसपेक्टर या वाहन इंसपेक्टर प्रदूषण नियंत्रित का प्रमाण मांग सकते है। संदेह होने की स्तिथि में पुन: जांच का आदेश कर सकते हैं।
  • धारा १९० (२) - वाहन प्रदूषण पंजीकरण के उलंघन हेतु दंड अधिनियम।

वाहन प्रदूषण जांच एवं प्रमाण पत्र की प्रक्रिया


वाहन द्वारा उत्सर्जित प्रदूषण की जांच किसी भी केंद्रीय प्रमाणित प्रदूषण जांच केंद्र (जो सभी पेट्रोल पंप एवं कुछ स्थानीय केंद्रों पर उपलब्ध है) से करवाकर, यदि उत्सर्जन मानकों के अनुसार है तो प्रदूषण नियंत्रित (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) का प्रमाण पत्र बनवाया जा सकता है।

प्रदूषण नियंत्रित प्रमाण पत्र की मान्य सीमा ६ माह तक होती है। वाहन द्वारा उत्सर्जित प्रदूषण की मात्रा के अनुसार यह अवधि कम भी हो सकती है जिसकी जानकारी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है। हर बार प्रमाण पत्र की अवधि समाप्त होने पर प्रदूषण की पुन: जांच कराना नियमानुसार आवश्यक है।

प्रदूषण नियंत्रित प्रमाण पत्र, सभी राज्यों के लिए समान होता है और इसे राज्यों के बीच परिवहन करते समय बार-बार लेना आवश्यक नहीं होता। लग्ज़री वाहनों के लिए प्रदूषण उत्सर्जन के नियमों में २०१८ में बदलाव आए हैं जिन की जानकारी केंद्रीय वेबसाइट पर उपलब्ध है।

प्रदूषण जांच उल्लंघन का दंड विवरण


केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम १९८९ की धारा १९० (२) के अनुसार किसी भी केंद्रीय पुलिस कर्मी या स्थानीय ट्रैफिक पुलिसकर्मी (हैड कांस्टेबल या उससे वरिष्ठ अधिकारी) के मांगे जाने पर प्रदूषण नियंत्रित प्रमाण पत्र ना प्रस्तुत करने की स्थिति में वाहन चालक पर न्यूनतम ₹१,००० (पहला दोष) से अधिकतम ₹२०,००० (पुनरावृत्ती की स्तिथि में) का अर्थदंड लागू किया जा सकता है।

भारत बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) के अनुसार तो वाहन बीमा के लिए प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र होना आवश्यक है।

वाहन पंजीकरण को उनकी वैधता की अवधि समाप्त होने पर रद्द किया जाता है, जैसा कि नई दिल्ली महानगर में १५ वर्ष से अधिक पुराने व्यावसायिक वाहनों के साथ किया गया था।

कुछ ऐसे नियम भी है जो वाहन निर्माण स्तर पर लागू होते हैं, जिनके बारे में वाहन चालक को चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है; वाहन निर्माता इन नियमों का स्वतः ही पालन करता है।

प्रदूषण जांच: हमारा कर्तव्य


२०२० में लागू होने वाले भारत स्टेज एमिशन ६ नियमों, के बाद यह अनुमान लगाया जा रहा है कि प्रदूषण से सम्बंधित नियम तीव्र गति से बदले जाएंगे। अपने नगर, अपने देश को प्रदूषण रहित रखने में वाहन पंजीकरण एवं प्रदूषण प्रमाण पत्र जनहित के लिए हमारा कर्तव्य बनता है और इसका पालन हमें करना ही चाहिए।

 

 

शब्द ज्ञान

चिन्ता होना (क्रिया)

अर्थ:- चिन्ता होना।

उदाहरण:- माँ को हमेशा अपने बच्चों की पड़ी रहती है। आपको केवल अपनी पड़ी है।

पर्यायवाची:- पड़ना